मथुरा (उप्र), चार अप्रैल (भाषा) दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्राप्त दिग्गज फिल्म अभिनेता मनोज कुमार का मूल गांव मथुरा के मांट क्षेत्र में था और लगभग सात सौ वर्ष पहले एबटाबाद में (अब पाकिस्तान में) बसने से पहले उनके पूर्वज मथुरा जिले में ही रहते थे।
यह दावा स्वयं मनोज कुमार ने ही एक बार वृन्दावन में आयोजित होने वाले ‘संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य समारोह’ का उद्धाटन करने के अवसर पर किया था।
दिग्गज फिल्म अभिनेता मनोज कुमार कुछ समय से बीमार थे और उम्र संबंधी समस्याओं के कारण कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में शुक्रवार तड़के उनका निधन हो गया। इस सूचना के बाद कुमार से जुड़ी यादें ताज़ा हो गयी हैं।
मथुरा के उस समारोह की आयोजन समिति के सचिव आचार्य गोपी गोस्वामी ने दावा किया, ‘‘मनोज कुमार भी मांट क्षेत्र के सारस्वत ब्राह्मण थे और चूंकि ठा. बांकेबिहारी की प्रतिमा का प्राकट्य करने वाले स्वामी हरिदास जी भी एक सारस्वत ब्राह्मण थे और तब से आज तक स्वामी जी की शाखा के वंशज ठा. बांकेबिहारी की सेवा-पूजा के अधिकारी होते हैं। इसलिए जब मुझे मनोज कुमार के बारे में जानकारी हुई तो मैंने भी और ज्यादा जानने के लिए उनसे प्रश्न किए।’’
आचार्य ने बताया, “तब उन्होंने (मनोज कुमार) विस्तार से बताया कि उस समय के सारस्वत ब्राह्मणों की एक शाखा के पूर्वज मथुरा से एबटाबाद जा बसे, तो दूसरी शाखा के पूर्वज मुल्तान पहुंच गए।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘मुल्तान जाने वाले पूर्वजों में से स्वामी हरिदास जी के पिता आशुधीर जी भी थे। उन्हीं के वंशज वर्तमान में ठा. बांकेबिहारी की सेवा-पूजा के अधिकारी हैं। जबकि मनोज कुमार एबटाबाद की शाखा के वंशज थे। उनका परिवार देश के विभाजन के दौरान अन्य लाखों हिन्दू परिवारों के समान ही दिल्ली आ बसा था।’’
भाषा सं आनन्द शफीक
शफीक