(कोमल पंचमटिया)
मुंबई, चार अप्रैल (भाषा) दिग्गज अभिनेत्री सायरा बानो ने कहा कि मनोज कुमार और दिलीप कुमार की दोस्ती को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। उन्होंने कहा कि दोनों दोस्त काम से परे रसोई में साथ मिलकर ऑमलेट बनाते, एक-दूसरे के साथ खाने की रेसिपी साझा करते और फिल्मों और कहानियों के बारे में चर्चा करते थे।
सायरा ने ‘उपकार’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों में ईमानदार, देशभक्त नायक की भूमिका निभाने के लिए प्रशंसकों के बीच ‘भरत कुमार’ के नाम से मशहूर मनोज कुमार के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वह और उनके पति दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार, उन्हें (मनोज कुमार) और उनकी पत्नी शशि को अपना परिवार मानते थे।
मनोज कुमार का शुक्रवार को उम्र संबंधी समस्याओं के कारण निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। मनोज कुमार का बचपन में नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था।
उन्होंने अपना नाम ‘मनोज कुमार’ 1949 की हिट फिल्म ‘शबनम’ में दिलीप कुमार द्वारा निभाए गए किरदार के नाम पर रखा था।
सायरा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मनोज जी हमेशा दिलीप साहब को राजा साहब कहकर बुलाते थे। यह नाम उन्होंने (मनोज कुमार) 1968 में आई फिल्म ‘आदमी’ से लिया था, जिसमें उन्होंने साहब के साथ काम किया था। वे दोनों बहुत करीब थे। दिलीप साहब के लिए उनके मन में बहुत सम्मान था, वे हमारे लिए परिवार के सदस्य की तरह थे। उनकी पत्नी शशि भी हमारे बहुत करीब थीं। हमारे बीच मिलने को लेकर समय लेने की जरूरत नहीं थी।”
उन्होंने कहा, “मनोज और शशि हमारे लिए परिवार जैसे थे।”
मनोज के साथ काम कर चुकीं दिग्गज अदाकारा सायरा ने कहा,“कल्पना कीजिए दिलीप साहब, मनोज साहब और उनके साथी इकट्ठा होते थे तो दोनों ऑमलेट बनाते थे। उनके पास ऑमलेट बनाने की खास ‘रेसिपी’ थी क्योंकि उन्हें अंडे बहुत पसंद थे। मुझे वह खास ‘आचार’ ऑमलेट याद है, जो मनोज जी की ‘रेसिपी’ थी। वे (मनोज कुमार और दिलीप कुमार) रेसिपी का आदान-प्रदान करते थे, साथ में खाना खाते थे और फिल्मों व कहानियों के बारे में बात करते थे।”
उन्होंने कहा कि दोनों दोस्तों को पतंग उड़ाना भी बहुत पसंद था। सायरा ने बताया कि उनके पति (दिलीप कुमार) के पास पतंगों और मांझे का भंडार था, जो खास तौर पर उत्तर प्रदेश से उनके लिए आते थे।
अभिनेत्री ने बताया कि पतंगों को खास तौर पर पानी से बचाने की जिम्मेदारी उनकी थी।
सायरा ने कहा, “वे (मनोज कुमार और दिलीप कुमार) उन दिनों साथ में पतंग उड़ाते थे और बीच-बीच में भजिया खाते थे। वे साथ में बहुत बढ़िया समय बिताते थे। आज, हम (अभिनेताओं के बीच) उस तरह का प्यार, प्रशंसा और सौहार्द नहीं देखते। यह सिर्फ सोशल मीडिया पर है, कोई भावना नहीं है।”
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष