नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) भारत पर अमेरिका के जवाबी शुल्क के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे निकट भविष्य में शेयर बाजार में गिरावट के साथ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों ने यह बात कही है।
अमेरिका ने भारत पर 27 प्रतिशत जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के आर्थिक एजेंडा के तहत अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
हालांकि, इस कदम से अमेरिका को भारत से होने वाले निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, जिन्हें अधिक शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।
एक्सिस सिक्योरिटीज ने कहा कि बाजार की उम्मीद से अधिक शुल्क के कारण निकट भविष्य में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा, ‘‘ये उपाय स्वाभाविक रूप से महंगाई को बढ़ाने वाले हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को जटिल बना सकते हैं। इसके अलावा, व्यापार में बाधा अगर बढ़ती है, तो इससे अमेरिका में मंदी का जोखिम बढ़ सकता है। कुल मिलाकर इससे वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में व्यापक मंदी आ सकती है।’’
वैश्विक वित्तीय बाजारों पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रभाव को देखते हुए, अल्पकालिक धारणा प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, एक्सिस सिक्योरिटीज का मानना है कि अस्थिरता में अवसर भी है और बाजार में गिरावट का उपयोग मजबूत आय संभावना वाली अच्छी कंपनियों के शेयरों की खरीद में किया जा सकता है।
आनंद राठी समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक सुजान हाजरा ने कहा, ‘‘ वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने से निकट अवधि में बाजार में गिरावट और उतार-चढ़ाव हो सकता है। लेकिन भारत की वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई हैं।’’
बाजार को कुछ सकारात्मक संकेतकों से भी समर्थन मिल रहा है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मुख्य रूप से आकर्षक मूल्यांकन, रुपये में मजबूती और वृहद आर्थिक संकेतकों में सुधार के चलते मार्च महीने के आखिरी छह कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से 31,000 करोड़ रुपये डाले हैं।
हाजरा ने कहा, ‘‘अमेरिका और चीन में अनिश्चितताओं के बढ़ने के साथ, हम उम्मीद करते हैं कि एफपीआई भारत के प्रति अधिक सकारात्मक रुख अपनाएंगे। कंपनियों की आय बेहतर होने, स्थिर घरेलू प्रवाह और शेयरों का मूल्यांकन ऐतिहासिक औसत से कम होने के साथ, भारतीय बाजार के लिए मध्यम से लंबी अवधि का दृष्टिकोण अनुकूल बना हुआ है।’’
भारतीय निवेशक के दृष्टिकोण से, अमेरिकी जवाबी शुल्क चिंता और स्पष्टता दोनों लाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, रत्न और आभूषण, वाहन कलपुर्जे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ जैसे प्रमुख निर्यातोन्मुख क्षेत्रों को भारी अमेरिकी शुल्कों के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, भारत के निर्यात का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र… औषधि को छूट दी गई है। यह एक उम्मीद की किरण है।
इन्वेसेट पीएमएस में भागीदार और कोष प्रबंधक अनिरुद्ध गर्ग ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी राहत है। खासकर तब जब भारतीय औषधि कंपनियां अमेरिका की जेनेरिक दवा की मांग का 40 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति करती है…यह भारत के लिए, फार्मा जैसे क्षेत्रों के लिए आगे बढ़ने का बड़ा अवसर है…।’’
भाषा रमण अजय
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