नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) पेशेवर नेटवर्किंग मंच लिंक्डइन के मुख्य आर्थिक अवसर अधिकारी अनीश रमन ने कहा है कि भविष्य में वृद्धि को गति देने का काम प्रौद्योगिकी उन्नति की जगह मानवीय नवाचार करेगी।
रमन ने यहां पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) को एक लक्ष्य की पूर्ति के साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। यह लक्ष्य ‘अधिक मानवीय कार्य करना है जो नवाचार की अनूठी क्षमता के इर्द-गिर्द केंद्रित है।’
उन्होंने व्यवसायों को सिर्फ दक्षता और उत्पादकता लाभ के लिए एआई पर ध्यान केंद्रित करने को लेकर आगाह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा रुख अपनाकर कंपनियां एआई से नवाचार के जरिये लाए जा सकने वाले वास्तविक मूल्यों को गंवाने का जोखिम मोल लेती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘बिजली की शुरुआत एक विचार के रूप में हुई। कंप्यूटिंग की शुरुआत एक विचार के रूप में हुई। जनरेटिव एआई की शुरुआत एक विचार के रूप में हुई। यह मानवीय नवाचार है, न कि प्रौद्योगिकी उन्नति। यह भविष्य की प्रगति को बढ़ावा देने वाला पहले से कहीं ज्यादा मानवीय नवाचार होगा।’’
रमन ने कहा कि इस नवाचारी अर्थव्यवस्था में प्रवेश करते समय असली चुनौती एआई को अपनाने के बारे में नहीं है। उन्होंने कहा कि उपकरणों के बेहतर होते जाने के साथ कर्मचारियों के ज्यादा मूल्य देखने को मिलेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘असली चुनौती मानवीय नवाचार को उस स्तर पर पहुंचाना है जिसे हमने पहले कभी नहीं देखा है। काम की जिस दुनिया में हम अभी रह रहे हैं, उसमें इंसानों के लिए नवाचार करना असाधारण रूप से कठिन है।’’
उन्होंने कहा कि शारीरिक और बौद्धिक श्रम ऐतिहासिक रूप से कामकाजी परिवेश पर हावी रहा है लेकिन जनरेटिव एआई इसके अधिकांश हिस्से को स्वचालित करने के लिए तैयार है।
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