(एलीसन कैली, स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी)
मेलबर्न, 27 फरवरी (द कन्वरसेशन) क्वांटम तकनीक अब प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रह गई है – यह हमारी रोजमर्रा की जिदगी में भी जगह बना रही है। अब, यह और भी ज्यादा बुनियादी चीज को बदलने जा रही है: दुनिया में हमारी आवाजाही का तरीका।
कल्पना कीजिए कि पनडुब्बियां समुद्र के नीचे से गुजर रही हैं, उन्हें लोकेशन अपडेट के लिए कभी सतह पर आने की जरूरत नहीं पड़े। विमान महाद्वीपों के बीच बिना किसी संकेत व्यवधान के, बिना किसी बाधा के, सटीकता के साथ उड़ान भरें।
इसकी मदद से आपातकालीन बचाव और राहत दल धुएं से भरी इमारतों या भूमिगत सुरंगों में सौ फीसद सटीकता के साथ आगे बढ़ सकते हैं, जबकि स्वचालित वाहन घने शहरी वातावरण में बिना किसी गड़बड़ी के अपना रास्ता बना सकते हैं।
ये परिदृश्य विज्ञान गल्प जैसे लग सकते हैं, लेकिन क्वांटम नेवीगेशन नामक एक उभरती तकनीक से इन्हें संभव बनाया जा सकता है।
यह परिवर्तनकारी तकनीक एक दिन आवाजाही, अन्वेषण और संपर्क को उन तरीकों से फिर से परिभाषित करेगी, जिनकी हम अभी कल्पना ही कर रहे हैं। तो, यह क्या है?
उपग्रह नेवीगेशन कई चीजों का केंद्र है।
जीपीएस जैसी वैश्विक नेवीगेशन उपग्रह प्रणालियां आधुनिक समाज में गहराई से समाहित हैं। हम नेवीगेशन, ऑर्डर की आपूर्ति करने और फोटो लोकेशन टैग करने के लिए रोजाना इनका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इनका असर सुविधा से कहीं ज्यादा है।
पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों से समय संकेत स्टॉक मार्केट कारोबार को प्रमाणित करते हैं और बिजली ग्रिड को संतुलित करने में मदद करते हैं। कृषि में, उपग्रह नेवीगेशन सुदूर संवेदी तकनीकों से ट्रैक्टरों के संचालन में मार्गदर्शन मिलता है और मवेशियों को इकट्ठा करने में मदद करता है।
आपातकालीन सेवाएं त्वरित प्रतिक्रिया के लिए नेवीगेशन उपग्रह प्रणालियों पर निर्भर करती हैं, जिससे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने में लगने वाला समय कम हो जाता है।
अपने लाभों के बावजूद, जीपीएस जैसी प्रणालियां काफी असुरक्षित हैं। उपग्रह सिग्नल जाम हो सकते हैं या उनमें हस्तक्षेप हो सकता है।
अंतरिक्ष का वातावरण भी स्थिर नहीं है। सूर्य नियमित रूप से प्लाज्मा के विशाल पुंज निकालता है, जिससे सौर तूफान पैदा होते हैं। ये उत्सर्जन पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, जिससे उपग्रहों और जीपीएस संकेतों में बाधा उत्पन्न होती है।
वैश्विक नेवीगेशन उपग्रह प्रणालियों में व्यवधान केवल असुविधा नहीं होगा बल्कि यह हमारे सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बाधित करेगा।
अनुमान है कि जीपीएस सुविधा की अनुपलब्धता से अकेले अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान होगा, जिससे परस्पर जुड़ी प्रणालियों में क्रमिक विफलताएं उत्पन्न होंगी
क्वांटम नेवीगेशन से बचाव
कुछ जगहों पर उपग्रहों से आने वाले नेवीगेशन संकेत बहुत अच्छे से काम नहीं करते। उदाहरण के लिए, वे पानी या भूमिगत स्थानों में प्रवेश नहीं कर पाते।
अगर आपने कभी गगनचुंबी इमारतों वाले शहर में ‘गूगल मैप्स’ का इस्तेमाल करने की कोशिश की है, तो आपको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऊंची इमारतों के कारण सिग्नल परावर्तन होता है, जिससे सटीकता कम हो जाती है और इमारतों के अंदर सिग्नल कमजोर हो जाते हैं या पूरी तरह से अनुपलब्ध हो जाते हैं।
यही वह स्थान है जहां एक दिन क्वांटम नेवीगेशन कारगर हो सकता है।
क्वांटम विज्ञान परमाणु से भी छोटे पैमाने पर कणों के व्यवहार का वर्णन करता है। यह सुपरपोजिशन – कणों का एक साथ कई अवस्थाओं में मौजूद होना – और उलझाव (जब कण अंतरिक्ष और समय के माध्यम से ऐसे तरीकों से जुड़े होते हैं जो पारंपरिक समझ को चुनौती देते हैं) जैसे आश्चर्यजनक प्रभावों को प्रकट करता है।
ये प्रभाव बदलाव वाले होते हैं और आमतौर पर निरीक्षण के दौरान खत्म हो जाते हैं, यही वजह है कि हम उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में नोटिस नहीं करते हैं। लेकिन क्वांटम प्रक्रियाओं की बेहद संवेदनशीलता उन्हें उत्कृष्ट सेंसर के रूप में काम करने देती है।
सेंसर एक ऐसा उपकरण है जो अपने आस-पास की दुनिया में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाता है और उस जानकारी को सिग्नल में बदल देता है जिसे हम माप सकते हैं या उपयोग कर सकते हैं।
क्वांटम सेंसर इतने संवेदनशील होते हैं क्योंकि क्वांटम कण अपने वातावरण में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर प्रतिक्रिया करते हैं। सामान्य सेंसर के विपरीत, जो कमजोर संकेतों को नहीं पहचान पाते, क्वांटम सेंसर समय, गुरुत्वाकर्षण या चुंबकीय क्षेत्र जैसी चीज़ों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी पहचानने में बहुत अच्छे होते हैं।
उनकी संवेदनशीलता इस बात से आती है कि जब उनके आसपास की कोई चीज बदलती है तो क्वांटम अवस्थाएं कितनी आसानी से बदल जाती हैं, जिससे हम चीजों को पहले की तुलना में अधिक सटीकता के साथ माप सकते हैं।
यह परिशुद्धता मजबूत नेवीगेशन प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण है।
हमारी टीम नेवीगेशन के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को मापने के लिए क्वांटम सेंसर का उपयोग करने के नए तरीकों पर शोध कर रही है। चुंबकीय सिग्नल क्योंकि जाम (इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों या प्रणालियों के दुश्मन के उपयोग को बाधित करने के उद्देश्य से विद्युत चुंबकीय ऊर्जा का जानबूझकर विकिरण या प्रतिबिंब) से अप्रभावित रहते हैं तथा पानी के अंदर भी काम करते हैं, इसलिए वे एक आशाजनक बैकअप प्रणाली प्रदान करते हैं।
नेवीगेशन का भविष्य
नेवीगेशन का भविष्य क्वांटम संकेतकों को एकीकृत करेगा, जिससे स्थान की सटीकता बढ़ेगी (पृथ्वी के चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण क्षेत्रों के माध्यम से), अभिविन्यास में सुधार होगा (क्वांटम जाइरोस्कोप के माध्यम से), तथा बेहतर समय निर्धारण संभव होगा (कॉम्पैक्ट परमाणु घड़ियों और परस्पर जुड़ी टाइमकीपिंग प्रणालियों के माध्यम से)।
ये प्रौद्योगिकियां पारंपरिक उपग्रह-आधारित नेवीगेशन को पूरक बनाने तथा कुछ मामलों में विकल्प प्रदान करने का वादा करती हैं।
क्वांटम नेवीगेशन की क्षमता हालांकि स्पष्ट है, लेकिन इसे व्यावहारिक वास्तविकता बनाना एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
स्टार्टअप और स्थापित कंपनियां क्वांटम एक्सेलेरोमीटर (गति मापने वाले उपकरण) और जाइरोस्कोप (एक युक्ति है जो किसी वस्तु की कोणीय स्थिति (झुकाव) को मापने के काम आती है) के शुरुआती स्वरूप विकसित कर रही हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश अभी प्रारंभिक परीक्षण चरण या विशेष अनुप्रयोगों में ही हैं।
प्रमुख बाधाओं में क्वांटम संवेदकों के आकार और बिजली की मांग को कम करना, नियंत्रित प्रयोगशाला स्थितियों के बाहर उनकी स्थिरता में सुधार करना और उन्हें मौजूदा नेवीगेशन प्रणालियों में एकीकृत करना शामिल है।
लागत एक अन्य बाधा है।
अगर इन चुनौतियों पर काबू पाया जा सकता है, तो क्वांटम नेवीगेशन सूक्ष्म लेकिन गहन तरीकों से रोजमर्रा की जिंदगी को नया आकार दे सकता है। हालांकि क्वांटम नेवीगेशन रातोंरात जीपीएस की जगह नहीं ले लेगा, लेकिन यह दुनिया को गतिमान रखने वाले बुनियादी ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बन सकता है।
द कन्वरसेशन प्रशांत नरेश
नरेश