चेन्नई, पांच दिसंबर (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा संस्थान के परिसर में स्थित एक स्कूल के छात्रों पर किए गए प्रारंभिक अध्ययन के कारण विवाद पैदा हो जाने के बीच प्राधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस मामले में कार्रवाई की गई है।
आईआईटी-एम की ओर से यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि स्कूल के प्रधानाचार्य को हटा दिया गया है और आईआईटी-एम के शिक्षकों को चेतावनी देने के अलावा प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
यह घटना अगस्त में हुई थी और एक अभिभावक द्वारा राज्य मानवाधिकार आयोग में की गई शिकायत के बाद इसका खुलासा हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि छात्रों के एक वर्ग पर ‘क्लीनिकल’ परीक्षण किया गया जो प्रासंगिक नियमों का उल्लंघन है। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया कि इस परीक्षण के लिए अभिभावकों से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।
‘वन वाणी मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल’ (वीवीएमएचएससी) की वेबसाइट के अनुसार, आईआईटी-एम के विशाल परिसर में स्थित वीवीएमएचएससी की स्थापना 1963 में हुई थी जिसे एक गैर-लाभकारी न्यास चलाता है। इस न्यास में आईआईटी-एम के निदेशक प्रबंध न्यायी हैं।
आईआईटी-मद्रास ने एक बयान में कहा कि तथ्यों का पता लगाने के लिए एक तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया गया है। व्यावसायिक रूप से उपलब्ध वस्तुओं का उपयोग करके बनाए किफायती ‘स्मार्ट इनसोल’ (जूतों में लगने वाला उपकरण) की व्यवहार्यता को समझने के लिए 19 अगस्त, 2024 को वन वाणी स्कूल में प्रारंभिक अध्ययन किया गया था।
संस्थान ने कहा, ‘‘न तो कोई ‘क्लीनिकल’ परीक्षण किया गया और न ही किसी चिकित्सकीय उपकरण का परीक्षण किया गया। न तो कोई दवा दी गई और न ही कोई उत्तेजक पदार्थ।’’
उसने कहा कि ‘स्मार्ट इनसोल’ को ‘छात्रों के जूतों के ‘इनसोल’ यानी जूते के भीतरी तले के अंदर रखा गया था ताकि इस उपकरण की मदद से चलने में होने वाली आसानी का अध्ययन किया जा सके (प्रति छात्र 10 मिनट से कम समय तक अध्ययन किया गया) और इसका मानव शरीर से कोई संपर्क नहीं था।’’
उसने कहा कि इन ‘स्मार्ट इनसोल’ के अलावा डेटा को अलग से इकट्ठा करने के लिए एक ‘स्मार्टवॉच’ का भी इस्तेमाल किया गया था। संकाय के अनुसार, यह कोई ‘क्लीनिकल’ परीक्षण नहीं, बल्कि केवल एक व्यवहार्यता परीक्षण था और यह माता-पिता की अनुमति के बिना भी किया जा सकता है।
संस्थान ने कहा कि यह पाया गया कि अध्ययन से पहले या उसके दौरान किसी भी छात्र पर कोई शल्य क्रिया नहीं की गई थी और न ही किसी भी छात्र को खाने या पीने के लिए कोई तरल या ठोस पदार्थ दिया गया था।
उसने कहा, ‘‘हालांकि स्कूल प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लिया है और स्कूल के प्रधानाचार्य को हटाकर उनके स्थान पर किसी अन्य को नियुक्त किया गया है।’’
बयान में कहा गया कि आईआईटीएम के संकाय को भी चेतावनी दी गई है और व्यवहार्यता अध्ययन करने से पहले माता-पिता की अनुमति सुनिश्चित नहीं करने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
बयान में कहा गया है कि व्यवहार्यता अध्ययन को उसी दिन 19 अगस्त, 2024 को तुरंत रोक दिया गया था।
भाषा सिम्मी पवनेश
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