गुजरात के राज्यपाल देवव्रत ने पर्यावरण बचाने, कृषि आय बढ़ाने के लिए ‘प्राकृतिक खेती’ की वकालत की

Ankit
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(फाइल फोटो के साथ)


(कुमार आनंद)

गांधीनगर, तीन दिसंबर (भाषा) गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों से ‘‘प्राकृतिक खेती’’ अपनाने का आह्वान किया जिससे उत्पादन पर समझौता किए बिना उत्पादन लागत कम हो सकती है। साथ ही इसे बेहतर पर्यावरण तथा समृद्धि की दिशा में एक बेहतर विकल्प बताया।

देवव्रत ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किए गए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (एनएमएनएफ) के पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पर्यावरण को बचाने, लोगों का बेहतर स्वास्थ्य और किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने का दृष्टिकोण है।

उन्होंने कहा कि जो किसान आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी जमीन को उपजाऊ बनाना चाहते हैं और भूमिगत जल को बचाना चाहते हैं उन्हें खेती की यह पद्धति अपनानी चाहिए।

एनएमएनएफ की शुरुआत के बारे में पूछे जाने पर देवव्रत ने कहा, ‘‘ (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी) का प्राकृतिक खेती के बारे में बेहद स्पष्ट विचार है कि हमें धरती माता को बचाना है, पर्यावरण को बचाना है, लोगों को स्वस्थ रखना है और किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग खुला रखना है। वह इसको लेकर स्पष्ट हैं और हर समय किसानों की चिंता करते हैं।’’

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत 2,481 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ एनएमएनएफ को एक स्वतंत्र केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू करने की 25 नवंबर को मंजूरी दी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘ जैविक खेती तथा प्राकृतिक खेती बिल्कुल अलग-अलग हैं। प्राकृतिक खेती में बाहर से कच्चा माल लाने की जरूरत नहीं होती, लागत लगभग नगण्य होती है और उत्पादन भी कम नहीं होता। जैविक खेती में अगर कच्चा माल बाहर से लाया जाए तो उत्पादन पूरा नहीं होता और लागत तथा मेहनत भी कम नहीं होती।’’

देवव्रत ने कहा, ‘‘ इसलिए मैं भारत के किसानों से अनुरोध करूंगा कि वे प्राकृतिक खेती की ओर लौटें और प्रधानमंत्री के मिशन में शामिल हों ताकि आप इस राष्ट्र तथा समाज के विकास तथा प्रगति में योगदान दे सकें, साथ ही स्वयं भी इसका फायदा उठा सकें।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह दोनों ने किसानों तथा अन्य हितधारकों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है। इसके परिणामस्वरूप गुजरात सरकार ने लगातार इस अभियान का समर्थन किया है और राज्य में लाखों किसान इससे अपना रहे हैं।

देवव्रत ने कहा कि विश्वविद्यालय गुजरात विद्यापीठ के कुलपति के तौर पर अपनी भूमिका में उन्होंने राज्य के 14,000 गांव के किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई छात्रों को इस अभियान में शामिल किया है।

गुजरात विद्यापीठ की स्थापना 1920 में महात्मा गांधी ने की थी।

उन्होंने कहा कि गुजरात विद्यापीठ में पढ़ने वाले 1,400 बेटे-बेटियों को छह दिनों तक प्राकृतिक खेती सिखाई जाती है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा



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