सेबी ने विशेषीकृत निवेश कोष के लिए नियामकीय रूपरेखा जारी की

Ankit
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नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को विशेषीकृत निवेश कोष (एसआईएफ) के लिए नियामकीय खाका पेश किया। इस कोष में न्यूनतम 10 लाख रुपये निवेश करने की जरूरत होगी।


भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने परिपत्र में कहा कि नई रूपरेखा एक अप्रैल से लागू होगी।

उल्लेखनीय है कि म्यूचुअल फंड और पीएमएस (पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा) के बीच अंतर को पाटने के लिए एसआईएफ की शुरुआत की गई है। निवेश की इस नई व्यवस्था में निवेशकों को एसआईएफ के तहत कम-से-कम 10 लाख रुपये का निवेश करना आवश्यक है। यह नियम मान्यता प्राप्त निवेशकों पर लागू नहीं होता है।

निवेशक एसआईपी, एसडब्ल्यूपी (नियमित अंतराल पर पैसा निकालने की योजना) और एसटीपी (सिस्टैमैटिक ट्रांसफर प्लान) का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन कुल निवेश 10 लाख रुपये से ऊपर रहना चाहिए। यदि बाजार में गिरावट के कारण निवेश मूल्य इस सीमा से नीचे चला जाता है, तो निवेशक केवल शेष पूरी राशि ही भुना सकता है।

निवेशक एक कंपनी की ऋण प्रतिभूतियों में 20 प्रतिशत (एएए-रेटिंग), 16 प्रतिशत (एए-रेटिंग), या 12 प्रतिशत (ए-रेटिंग और नीचे) से अधिक निवेश नहीं कर सकते हैं।

इसके अलावा, वे किसी एक क्षेत्र में शुद्ध संपत्ति मूल्य (एनएवी) का 25 प्रतिशत से अधिक निवेश नहीं कर सकते हैं।

सेबी ने पात्रता के संबंध में कहा कि पंजीकृत म्यूचुअल फंड एक या दो माध्यमों (मार्गों) के जरिये पात्रता मानदंडों को पूरा करता है, एसआईएफ स्थापित कर सकता है।

पहले माध्यम के लिए आवश्यक है कि म्यूचुअल फंड पिछले तीन वर्षों में कम-से-कम 10,000 करोड़ रुपये की प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) के साथ कम-से-कम तीन वर्षों से परिचालन में हो। इसके अतिरिक्त, पिछले तीन वर्षों में प्रायोजक या एएमसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी हो या शुरू नहीं की गयी हो।

वैकल्पिक मार्ग या माध्यम के तहत संपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) को एसआईएफ के लिए एक मुख्य निवेश अधिकारी नियुक्त करने की जरूरत होती है, जिसके पास कम से कम 10 साल का कोष प्रबंधन अनुभव हो और उसने कम से कम 5,000 करोड़ रुपये का औसत प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति प्रबंधित किया हो। इसे कम से कम तीन साल के कोष प्रबंधन अनुभव और कम-से-कम 500 करोड़ रुपये के औसत एयूएम के साथ एक अतिरिक्त कोष प्रबंधन भी नियुक्त करना होगा।

इस विकल्प में भी जरूरी है कि पिछले तीन वर्षों में प्रायोजक या एएमसी के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गयी हो या कोई कार्रवाई शुरू नहीं हुई हो। एएमसी को म्यूचुअल फंड और एसआईएफ के बीच परिचालन संसाधनों को साझा करने की अनुमति है।

भाषा रमण अजय

अजय



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