समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए राज्यों को कोई दिशानिर्देश नहीं जारी किए गए : केंद्र |

Ankit
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नयी दिल्ली, छह दिसंबर (भाषा) सरकार ने शुक्रवार को इस बात को खारिज कर दिया कि समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए इसने राज्यों को दिशानिर्देश जारी किए हैं।


विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के बारे में लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, ‘‘समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों को कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किए गए हैं।’’

मंत्री ने कहा कि संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर ने संविधान सभा में प्रासंगिक प्रावधान पेश करते हुए देश में समान नागरिक संहिता पर जोर दिया था।

मेघवाल ने आंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा, ‘अब तक एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां नागरिक कानून नहीं पहुंच सके हैं, वह है विवाह और उत्तराधिकार तथा इसलिए, संविधान के एक भाग के रूप में मसौदा अनुच्छेद 35 (अब अनुच्छेद 44) दिया गया है।’

इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय ने समान नागरिक संहिता के संबंध में कई निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए कहा था कि संविधान की भावना भी ऐसी समान संहिता को बढ़ावा देती है।

उत्तराखंड ने हाल ही में अपना समान नागरिक संहिता लागू किया है। केंद्र ने इस मामले को विधि आयोग को भेज दिया है, जिसने पिछले साल इस पर नए सिरे से सार्वजनिक विमर्श शुरू किया है।

इससे पहले, 21वें विधि आयोग ने जो अगस्त 2018 तक कार्यरत था, इस मुद्दे पर गौर किया था और दो मौकों पर सभी हितधारकों से विचार मांगे थे।

भाषा अविनाश रंजन

रंजन



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