पटना, 27 फरवरी (भाषा) चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ‘शारीरिक रूप से थके हुए और मानसिक रूप से सेवानिवृत्त’ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में जद(यू) एक भी सीट नहीं जीत पाएगी।
किशोर को उम्मीद है कि उनकी अपनी पार्टी जन सुराज पार्टी इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में धूम मचाएगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अप्रैल में एक रैली करने की योजना बनाई है ‘जो भीड़ के मामले में सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी’।
पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, ‘नीतीश कुमार पाला बदलते हुए सत्ता की कुर्सी पर बने रहने में कामयाब रहे हैं। जद(यू) के पास कम सीटें होने पर भी उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल सकता है।’
किशोर ने कहा, ‘इस चक्र को तोड़ने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि तीर (जदयू का चुनाव चिह्न) कमल (भाजपा) के साथ न तैरे और न ही लालटेन (राजद) के साथ चमके, मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे इस तरह से वोट करें कि जद(यू) एक भी सीट न जीत पाए। तभी हम ऐसे मुख्यमंत्री से छुटकारा पा सकेंगे जो शारीरिक रूप से थके हुए और मानसिक रूप से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।’
जद (यू) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने भाजपा पर ‘‘नीतीश कुमार को मुखौटे के रूप में इस्तेमाल करते हुए सत्ता का आनंद लेने’ का आरोप लगाया और कहा कि ‘सार्वजनिक धन की लूट और कुछ विमुख जातियों को खुश करने’ के इरादे बुधवार को मंत्रिमंडल विस्तार किया गया, जबकि चुनाव में मुश्किल से छह महीने बचे हैं।
किशोर ने दावा किया कि लोग राजग और राजद नीत विपक्ष से तंग आ चुके हैं जो ‘‘जंगल राज के लिए जिम्मेदार है’’। उन्होंने कहा कि वह 11 अप्रैल को ‘बदलो बिहार रैली’ आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।
किशोर ने कहा, ‘हमने पटना में जिला प्रशासन को पत्र लिखकर 11 अप्रैल को रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी है। मुझे लगता है कि भीड़ सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। हालांकि हमें यह भी लगता है कि घबराई हुई सत्तारूढ़ सरकार अनुमति देने से इनकार करके बाधाएं खड़ी करने की कोशिश कर सकती है।’
किशोर से मुख्यमंत्री के बेटे निशांत द्वारा हाल में की गई टिप्पणी कि उनके पिता सौ प्रतिशत फिट हैं और उन्हें एक और कार्यकाल मिलना चाहिए, के बारे में पूछे जाने पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने कहा, ‘मैं निशांत के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता, क्योंकि वह सार्वजनिक जीवन में नहीं हैं। लेकिन मैं उनके पिता को चुनौती देता हूं कि वे कागज पर नजर डाले बिना राज्य मंत्रिमंडल के मंत्रियों के नाम बताएं। अगर नीतीश कुमार इस तरह अपनी मानसिक स्थिरता का परिचय देते हैं, तो मैं अपनी राजनीति छोड़ दूंगा और उनके लिए काम करना शुरू कर दूंगा।’
भाषा अनवर शोभना
शोभना