वायनाड (केरल), 10 अगस्त (भाषा) केरल के वायनाड जिले में 30 जुलाई को हुए विनाशकारी भूस्खलन के बाद, एक अभूतपूर्व अपशिष्ट प्रबंधन अभियान संचालित किया जा रहा है जो देश के लिए एक मॉडल है और इस प्रक्रिया को जारी बचाव कार्यों में सहजता से एकीकृत किया जा रहा है।
‘द सुचित्वा मिशन, क्लीन केरल कंपनी और राज्य स्थानीय स्वशासन विभाग (एलएसजीडी) के तहत हरित कर्म सेना के हजारों सदस्य एवं अन्य समर्पित श्रमिकों ने अब तक 81.64 टन ठोस अपशिष्ट और 106.35 किलोलीटर शौचालय अपशिष्ट को हटा दिया है।
राज्य के एलएसजीडी मंत्री एम बी राजेश ने कहा कि अब तक हरित कर्म सेना के कार्यकर्ताओं, अधिकारियों और स्वयंसेवकों सहित लगभग 2,850 लोगों ने सफाई अभियान में भाग लिया।
राजेश ने कहा कि सरकार ने अपशिष्ट प्रबंधन में प्रभावी रूप से हस्तक्षेप किया है और भूस्खलन क्षेत्र और राहत शिविरों में अपशिष्ट मुद्दे का समाधान किया।
राजेश ने कहा, ‘भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों में प्रभावी अपशिष्ट संग्रह और निपटान ने केरल को आपदा क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन में एक नयी मिसाल कायम करने में मदद की है।’
मंत्री ने कहा कि ठोस अपशिष्ट में 10.6 टन बायोडिग्रेडेबल कचरा, 49.47 टन नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा शामिल है जिसमें प्लास्टिक, 0.3 टन सैनिटरी कचरा, 2.64 टन बायोमेडिकल कचरा और 18.63 टन कपड़ा कचरा शामिल है।
उन्होंने यह भी बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों में सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें 150 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि बचावकर्मियों के लिए मुंडक्कई और चूरलमाला के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में 46 जैव-शौचालय स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों द्वारा हर दो घंटे में जैव-शौचालय की सफाई की जाती है।
उन्होंने कहा कि इस बीच, नैपकिन और डायपर सहित सैनिटरी अपशिष्ट को क्लोरीन मुक्त पीले कवर में एकत्र किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एलएसजीडी ने करीब 2.64 टन जैव-चिकित्सा अपशिष्ट और 18.63 टन कपड़ा अपशिष्ट का भी वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया।
वायनाड में 30 जुलाई की सुबह केरल में आई सबसे भीषण आपदा में 226 लोगों की जान चली गई और 130 से अधिक लोग लापता हैं।
भाषा अमित रंजन
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