(किशोर द्विवेदी)
महाकुंभ नगर, 27 फरवरी (भाषा) महाकुंभ मेले ने जहां एक ओर आध्यात्मिक अनुभूति के लिए लोगों को आकर्षित किया, वहीं इसने कई छोटे दुकानदारों को कमाई का बड़ा अवसर प्रदान किया जो 45 दिनों के इस महासमागम में आवश्यक वस्तुएं बेचकर और सेवाओं की पेशकश कर अपनी आजीविका अर्जित कर सके।
पूरे मेले में घाटों, रास्तों और छोटे मार्गों पर रेहड़ी पटरी वाले दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगा रखी थीं जहां पूजा सामग्री से लेकर मूर्तियां, धागे, सिंदूर, चूड़ियां और साहित्य तक उपलब्ध थे। इनके अलावा, छोटे दुकानदारों ने सब्जियों, गोबर के कंडे, लकड़ी, बर्तन, कपड़े, कंबल, आदि की बिक्री की। ये दुकानें 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थित थी।
सहसों से आकर खिलौने की दुकान लगाने वाले वीरेंद्र बिंद ने कहा कि उसकी बिक्री शानदार रही क्योंकि मेले में काफी बच्चे भी आए।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं 60 रुपये में एक सॉफ्ट टाय बेचता हूं। शुरुआत में मैं इसका दाम 70 रुपये मांगता हूं और यदि ग्राहक राजी हो जाता है तो मुझे हर बिक्री पर अतिरिक्त 10 रुपये का लाभ होता है।’’
बुलंदशहर से आए रामपाल केवट ने कहा कि वह नाविक परिवार से हैं और उसके पिता नाव चलाते हैं, लेकिन महाकुंभ से पहले उन्होंने फोटोग्राफी सीखनी शुरू की और एक कैमरा खरीदा।
उन्होंने कहा,‘‘मैं तुरंत प्रिंट निकालने वाला प्रिंटर साथ लेकर चलता हूं। मेले के दौरान मैंने फोटोग्राफी कर प्रतिदिन औसतन 5,000-6,000 रुपये की कमाई की। मैं प्रति तस्वीर 50 रुपये लेता हूं।’’
यह पूछे जाने पर कि उसने इतने पैसे का क्या किया, केवट ने बताया कि वह रोज दिन ढलने के बाद सारे पैसे अपने परिवार को भेज देता था।
प्रतापगढ़ जिले से आए अभिषेक ने मेले में रंगबिरंगे धागों की दुकान लगाई थी। इससे पहले वह एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए ड्राइवर का काम करता था। अभिषेक ने बताया, ‘‘मैं एक धागा 10 रुपये में बेच रहा हूं चाहे वह किसी भी रंगा का क्यों ना हो। मैंने थोक के भाव में इसे बनारस से खरीदा जहां इसकी लागत 3 रुपये प्रति धागा थी।’’
प्रयागराज में रहने वाले मनशू ने अपने परिवार के साथ सेक्टर 19 के पास ‘फास्ट फूड’ की दुकान लगाई थी जहां उन्होंने 10 रुपये प्रति कप चाय और 50 रुपये प्रति प्लेट मैगी नूडल्स बेचा।
दुकान पर लगे एक छोटे पोस्टर में लिखा था ‘बाइक टैक्सी’ के लिए संपर्क करें, इसके बारे में पूछने पर मनशू ने बताया, “मैंने कुंभ मेला क्षेत्र में बाइक टैक्सी भी चलाई जिससे मुझे अतिरिक्त आय हुई।”
महाकुंभ मेला 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी को समाप्त हुआ जिसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई।
भाषा किशोर राजेंद्र शोभना
शोभना