मुंबई, पांच अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने शनिवार को कहा कि भारत दर्शन के साथ व्यापार के क्षेत्र में भी ‘विश्वगुरु’ बन सकता है।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मातृ संगठन आरएसएस के वरि्ष्ठ नेता ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की एक शिष्टाचार यात्रा के दौरान कहा कि एक राष्ट्र विश्वास और पारदर्शिता के आधार पर ही फल-फूल सकता है।
होसबाले ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए जवाबी शुल्क से विश्व व्यापार में मची उथलपुथल के बीच अपनी टिप्पणी में कहा, ‘हम केवल दर्शन में ही नहीं, बल्कि व्यापार में भी विश्वगुरु बन सकते हैं।’
उन्होंने कहा कि विश्वगुरु होने का मतलब दुनिया को व्यापार और नैतिकता के अच्छे तरीकों के बारे में सिखाना है।
उन्होंने कहा कि इसमें कार्यस्थल, परिवार, राजनीतिक क्षेत्र और विज्ञान में अच्छे व्यवहार के बारे में बात करना भी शामिल है।
शेयर बाजार की तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाले वाक्यांश ‘विश्वास और पारदर्शिता’ का हवाला देते हुए होसबाले ने कहा कि समाज और राष्ट्र इन मूल्यों के बल पर फल-फूल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में लंबे समय से व्यापार की परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि दूसरी शताब्दी के एक शिलालेख में एक साड़ी का विज्ञापन है, जिसमें महिलाओं को यह संदेश दिया गया है कि उनके पतियों को कौन सा परिधान सबसे अधिक पसंद आएगा।
होसबाले ने एनएसई की तारीफ करते हुए कहा कि भारत का उच्च आर्थिक विकास और लोगों के व्यवहार में बदलाव एक्सचेंज जैसी संस्थाओं के कारण है।
उन्होंने साइबर हमले के गलत इरादों को नाकाम करने के लिए तंत्र स्थापित करने के लिए एनएसई की सराहना की। कुछ साल पहले संदिग्ध साइबर हमले के कारण एनएसई को व्यवधान का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने के लिए साइबर हमला हो सकता है, रासायनिक हमला हो सकता है या वायरस हमला भी हो सकता है।
आरएसएस नेता ने कहा, ‘हमें हर क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं की जरूरत है। किसी भी क्षेत्र में भारत की सुरक्षा के लिए हानिकारक किसी भी चीज के खिलाफ देश को मजबूत करने की शक्ति लोगों में है।’
उन्होंने किसी भी प्रतिकूल गतिविधि से बचाव के लिए क्षमता निर्माण की जरूरत पर भी बल दिया।
भाषा प्रेम प्रेम संतोष
संतोष