नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि भारत को प्राकृतिक संसाधनों के लिए सर्वश्रेष्ठ भूविज्ञान प्राप्त है, तथा भारत के भूमिगत संसाधनों से मूल्य प्राप्त करने में देश के उद्यमियों की क्षमता पर भरोसा करना ही विकसित भारत की कुंजी है।
उन्होंने कहा, “यह ऐसे साहसी और दूरदर्शी उद्यमियों की एक नई पीढ़ी को सामने लाने का हमारा समय है, जो जिम्मेदारी से संसाधनों की खोज और उनका दोहन करे, धरती माता का सम्मान करे तथा भारत की वृद्धि को बढ़ावा दे। यदि हम अभी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो हम अपने भविष्य को सुरक्षित करने तथा दुनिया में संसाधन के मामले में भारत की अग्रणी स्थिति को मजबूत करने के इस सुनहरे अवसर को खो सकते हैं।”
प्राकृतिक संसाधनों में अपार संभावनाओं पर अग्रवाल ने कहा, “धरती के नीचे अपार संपदा है। भारत का भूविज्ञान दुनिया में सबसे अच्छा है, लेकिन हमारा 60 प्रतिशत आयात तेल और गैस, सोना, तांबा, हीरे आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों के कारण होता है।”
उन्होंने कहा कि सभी देश जो समृद्ध हुए हैं, वे अपने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करके ही समृद्ध हुए हैं, चाहे वह अमेरिका हो, ब्रिटेन हो, यूरोप हो, कनाडा हो, ऑस्ट्रेलिया हो या पश्चिम-एशिया हो।
वेदांता के चेयरमैन ने कहा, “भारत को बस अन्वेषण करने की ज़रूरत है।”
उन्होंने कहा कि भारत में तेल और गैस के साथ-साथ बॉक्साइट, कोयला, लौह अयस्क, तांबा और दुर्लभ मृदा जैसे खनिजों के प्रचुर भंडार हैं।
अग्रवाल ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच भी भारत की संभावनाओं के बारे में उम्मीद जताई।
उन्होंने कहा, “यह उद्यमियों का युग है, और भारतीय जन्मजात जोखिम लेने वाले होते हैं। हमें जोखिम लेने की अपनी क्षमता का लाभ उठाने और भारत में बड़े पैमाने पर विनिर्माण और बड़े उद्योग बनाने की आवश्यकता है क्योंकि कृषि अकेले वृद्धि और रोजगार सृजन सुनिश्चित नहीं कर सकती है।”
उन्होंने कहा, “देश में 65 प्रतिशत लोग मध्यम वर्ग से नीचे हैं और जल्द ही मध्यम वर्ग में प्रवेश करेंगे। मांग तेजी से बढ़ेगी। व्यापार के अवसर बहुत बड़े हैं।”
अग्रवाल ने उद्यमियों में अधिक विश्वास का आह्वान करते हुए कहा, “विनियमन और स्व-प्रमाणन ही आगे का रास्ता है। मैं सरकार को इस दिशा में सोचने के लिए बधाई देता हूं।”
भाषा अनुराग अजय
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