(मानस प्रतिम भुइयां)
कोलंबो, पांच अप्रैल (भाषा) भारत-श्रीलंका रक्षा साझेदारी समझौते पर शनिवार को हस्ताक्षर किए गए जिससे दोनों देशों के बीच मौजूदा सैन्य भागीदारी को संस्थागत रूप मिलेगा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यह जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देशों के सुरक्षा हित आपस में जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इस समझौते से रक्षा से जुड़े औद्योगिक क्षेत्र में संभावित सहयोग सहित अधिक संरचनात्मक सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमा दिसानायके के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान यह समझौता हुआ। यह भारत-श्रीलंका रक्षा संबंधों को बढ़ावा देने के एक बड़े प्रयास का संकेत है, क्योंकि लगभग चार दशक पहले द्वीपीय राष्ट्र में भारतीय शांति सेना के हस्तक्षेप के कारण संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया था।
मिस्री ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व स्तर पर यह मान्यता है कि भारत और श्रीलंका के सुरक्षा हित आपस में जुड़े हुए हैं।
विदेश सचिव ने कहा कि इसी समझ के आधार पर दोनों पक्षों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिससे मौजूदा रक्षा साझेदारी को और बल मिलेगा, तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता प्रदर्शित होगी।
मिस्री ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि यह समझौता दोनों नेताओं के बीच ‘बहुत अच्छी बातचीत’ का परिणाम है, जो पिछले दिसंबर में दिसानायके की नयी दिल्ली यात्रा के दौरान शुरू हुई थी।
मिस्री ने कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि दोनों पक्षों के कथनों में एक बात बहुत करीब से समान है, वह है श्रीलंका और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की पूरी तरह से परस्पर संबद्ध प्रकृति की मान्यता।’’
विदेश सचिव ने कहा कि दिसानायके ने दिसंबर में अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान और शनिवार की बैठक के दौरान, ”बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि श्रीलंकाई भू-क्षेत्र का उपयोग इस तरह से नहीं किया जाएगा और ना ही ऐसे तरीके से उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी जो भारत के हितों के लिए प्रतिकूल या हानिकारक हो।”
उन्होंने बताया कि शनिवार को मोदी के साथ अपनी वार्ता में दिसानायके ने कहा कि न तो श्रीलंका की भूमि और न ही उसके आसपास के महासागरों का इस्तेमाल इस तरह से अनुमति नहीं दी जाएगी जो भारत की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह से हानिकारक हों।
इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर ऐसे समय में हुए हैं जब कोलंबो पर अपना प्रभाव बढ़ाने के चीन के निरंतर प्रयासों को लेकर नयी दिल्ली में चिंताएं बढ़ रही हैं।
अगस्त 2022 में श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर चीनी मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज ‘युआन वांग’ के आने से भारत और श्रीलंका के बीच कूटनीतिक विवाद शुरू हो गया था। अगस्त 2023 में कोलंबो बंदरगाह पर एक और चीनी युद्धपोत तैनात किया गया था।
भाषा रवि कांत रवि कांत संतोष
संतोष