भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वार्ता का शुरुआती दौर संपन्नः सूत्र

Ankit
3 Min Read


नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) भारत और अमेरिका के अधिकारियों ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर शुरुआती बातचीत का दौर शनिवार को पूरा कर लिया। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी।


सूत्रों ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की रूपरेखा को लेकर शुरू हुई बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है।

अमेरिका के दक्षिण एवं पश्चिम एशिया के सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रैंडन लिंच के नेतृत्व में अमेरिकी अधिकारियों का एक दल प्रस्तावित समझौते पर वार्ता के लिए भारत दौरे पर आया हुआ है।

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही सीमा शु्ल्क का मुद्दा लगातार चर्चा के केंद्र में है। ट्रंप ने भारत पर दो अप्रैल से जवाबी सीमा शु्ल्क लगाने की घोषणा की हुई है।

अमेरिका चीन पर पहले ही शुल्क लगा चुका है। इसके अलावा, 12 मार्च से स्टील और एल्युमीनियम पर 25 प्रतिशत का उच्च आयात शुल्क लगाया गया है।

ट्रंप ने 26 मार्च को पूरी तरह से निर्मित वाहनों (सीबीयू) और वाहन कलपुर्जों पर 25 प्रतिशत का व्यापक शुल्क लगाने की भी घोषणा की जो तीन अप्रैल से प्रभावी होने वाला है।

सीमा शुल्क आयात पर लगाए जाने वाले शुल्क हैं जो सरकार द्वारा लगाए और वसूले जाते हैं और विदेशी वस्तुओं को देश में लाने के लिए कंपनियों द्वारा भुगतान किए जाते हैं।

भारत और अमेरिका इस साल सितंबर-अक्टूबर तक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उन्होंने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 190 अरब डॉलर से दोगुना कर 500 अरब डॉलर करने का लक्ष्य भी रखा है।

अमेरिका ने कुछ औद्योगिक वस्तुओं, वाहन, शराब, पेट्रोकेमिकल उत्पादों, डेयरी, कृषि वस्तुओं में भारत से शुल्क रियायतों की मांग की है जबकि भारत कपड़ा जैसे श्रम-बहुल क्षेत्रों के लिए शुल्क में कटौती पर विचार कर सकता है।

भारतीय उद्योग और निर्यातकों ने सरकार से अमेरिका के जवाबी सीमा शुल्क प्रावधान से बचाने की मांग की है। उन्होंने उन शुल्कों से छूट मांगी है क्योंकि इससे उन्हें बहुत नुकसान होगा क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

अमेरिका चाहता है कि भारत एक बड़े और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर उसके साथ बातचीत करे। वह अमेरिकी व्यवसायों के लिए कृषि क्षेत्र को खोलने की मांग भी कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा होने के कारण कृषि और डेयरी क्षेत्र को व्यापार वार्ता में शामिल करने के लिए तैयार नहीं होगा। वर्ष 2024 में भारत को अमेरिका का कृषि निर्यात 1.6 अरब डॉलर था।

भाषा प्रेम प्रेम

प्रेम



Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *