बहु-राज्य उपस्थिति वाली कंपनियों को एक अप्रैल 2025 तक आईएसडी के रूप में खुद को कराना होगा पंजीकृत

Ankit
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नयी दिल्ली, सात अगस्त (भाषा) कई राज्यों में उपस्थिति रखने वाली तथा शाखा कार्यालयों के साथ ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ वितरित करने वाली कंपनियों को एक अप्रैल 2025 तक जीएसटी प्राधिकरणों के समक्ष ‘इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर’ (आईएसडी) के रूप में पंजीकरण कराना होगा।


फरवरी में पेश किए वित्त विधेयक, 2024 के जरिये सरकार ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून में संशोधन करते हुए कहा था कि बहु-राज्य जीएसटी पंजीकरण वाले व्यवसायों को सेवाओं के लिए किसी भी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) को अपनी शाखाओं के बीच वितरित करने के लिए खुद को अनिवार्य रूप से आईएसडी के रूप में पंजीकृत कराना होगा।

आईटीसी को साझा करने की व्यवस्था जीएसटी नियमों में निर्धारित है और मोटे तौर पर समान आईटीसी को एक ही पैन वाली विभिन्न शाखाओं के टर्नओवर के अनुपात में विभाजित किया जाता है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने अब बहु-राज्य शाखाओं वाली सभी कंपनियों को आईएसडी के रूप में पंजीकृत कराने की अंतिम तिथि एक अप्रैल 2025 अधिसूचित की है।

लेखा एवं परामर्श कंपनी मूर सिंघी के कार्यकारी निदेशक रजत मोहन ने कहा यह कदम परिचालन पारदर्शिता बढ़ाने का एक प्रयास है। इससे करदाताओं को राज्यों में सामान्य ‘बिल’ पर उचित तरीके से कर क्रेडिट वितरित करने में मदद मिलेगी।

केपीएमजी के भारत में साझेदार एवं अप्रत्यक्ष कर प्रमुख अभिषेक जैन ने कहा कि सरकार ने आईएसडी प्रावधानों के क्रियान्वयन के लिए उचित समय दिया है, जिससे कंपनियों को पूरी तरह से तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

भाषा निहारिका

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