नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल में कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक समाज की आधारशिला है और पत्रकारों को कानूनी प्रतिशोध के डर के बिना अपना निर्णय लेने के लिए कुछ हद तक स्वतंत्रता होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह टिप्पणी की।
अदालत ने ऑनलाइन पत्रिका प्रकाशित करने वाली एक मीडिया कंपनी द्वारा प्रकाशित कथित मानहानिकारक लेख को हटाने के लिए एक कंपनी की याचिका पर आई।
याचिकाकर्ता कंपनी ने दावा किया कि यह लेख अपमानजनक है तथा इससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।
अदालत ने दावे को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी और उसके संस्थापकों ने लेख के प्रकाशन के एक वर्ष बाद अदालत का रुख किया और कंपनी की ओर से तत्परता की कमी की वजह से उसका पक्ष कमजोर हुआ है।
लेख में कंपनी की कथित कार्य संस्कृति के बारे में बताया गया था।
अदालत ने कहा, ‘पत्रकारिता के दृष्टिकोण से, यह लेख लापरवाह रिपोर्टिंग की श्रेणी में नहीं आता है और दावा किया जाता है कि यह स्रोत-आधारित, संदर्भ-विशिष्ट रिपोर्टिंग है।’
भाषा जोहेब देवेंद्र
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