थके हुए तीर्थयात्रियों के लिए बड़ी राहत हैं त्रिवेणी मार्ग पर तिपहिया |

Ankit
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(तस्वीर के साथ)


(कुणाल दत्त)

महाकुंभनगर, 26 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ मेले के आयोजन के मद्देनजर त्रिवेणी मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर रोक के बीच कई किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर तीर्थयात्रियों के लिए तिपहिया गाड़ियां बड़ी राहत साबित हो रही है।

बड़ी संख्या में तीर्थयात्री महाकुंभनगर की तरफ से मुख्य शहर में आने के लिए इन गाड़ियों का सहारा ले रहे हैं। इन छोटे, हल्के और पर्यावरण-अनुकूल वाहनों की सेवा सिर्फ टेंट सिटी क्षेत्र से बाहर आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए उपलब्ध है, संगम स्थल की तरफ जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए नहीं।

बुधवार को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व के साथ प्रयागराज में 45 दिनों का महाकुंभ मेला संपन्न हो गया। महाशिवरात्रि के मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई।

पिछले दो दिनों में त्रिवेणी मार्ग पर थके हुए तीर्थयात्रियों के लिए तिपहिया गाड़ियों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। ये गाड़ियां एक बार में चार से पांच तीर्थयात्रियों को ले जा सकती हैं। इसे आम तौर पर एक चालक खींचता है और जब यात्रियों की संख्या ज्यादा होती है, तो पीछे से उसका (चालक) साथी गाड़ी में धक्का लगाता है।

तिपहिया गाड़ियों में यात्रियों के बैठने के लिए लकड़ी या धातु का फ्रेम लगाया गया है और पुरुष व महिला दोनों तीर्थयात्री महाकुंभनगर से मुख्य शहर की ओर जाने के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।

जरूरत के समय में अनौपचारिक परिवहन सेवा प्रदान करने के इस स्वैच्छिक कार्य की कई तीर्थयात्रियों ने तारीफ की है। कुछ तीर्थयात्रियों ने “ठेले” का परिष्कृत रूप कही जाने वाली इन गाड़ियों की सवारी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए हैं।

तिपहिया वाहन चलाने वाले ज्यादा श्रमिक राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे अन्य राज्यों से आए दिहाड़ी मजदूर हैं, जो इस अवसर का लाभ उठाकर अच्छी कमाई करने की उम्मीद में पिछले महीने प्रयागराज आए थे।

मध्यप्रदेश निवासी रॉकी ने नया पुल की तरफ से त्रिवेणी मार्ग पर मुख्य टेंट सिटी की ओर अपनी तिपहिया गाड़ी खींचते समय ‘पीटीआई-भाषा’ से अपनी कहानी साझा की।

रॉकी ने कहा, “मैं जनवरी में मेला शुरू होने के बाद यहां आया था। मैं रोजाना शाम से लेकर देर रात तक तिपहिया गाड़ी की सेवाएं देने की कोशिश करता हूं। तीर्थयात्रियों को राहत मिलती है और हम कुछ पैसे कमा लेते हैं। मुझे लगता है कि यह दोनों पक्षों के लिए फायदे वाली स्थिति है।”

चार से पांच किलोमीटर लंबे मार्ग पर संचालित इन गाड़ियों के चालक प्रति सवारी औसतन 100 रुपये या इससे अधिक किराया वसूलते हैं।

राजस्थान के लल्लू राम ने मेले में कमाई के इरादे से एक नयी गाड़ी खरीदी और एक स्थानीय व्यक्ति से एक गाड़ी किराये पर ली।

लल्लू ने कहा, “मैंने 20,000 रुपये में नयी तिपहिया गाड़ी खरीदी और मेले में इसका इस्तेमाल कर रहा हूं। मैंने एक गाड़ी किराये पर भी ली है, जिसका इस्तेमाल मेरे परिवार के सदस्य कर रहे हैं। हम राजस्थान से एक समूह में आए हैं।”

जब इन गाड़ियों का त्रिवेणी मार्ग पर संचालन बंद होता है तो इन्हें सड़क किनारे खड़े देखा जा सकता हैं जहां ये चालकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए अस्थायी बिस्तर का काम करती हैं।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश



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