चेन्नई, दो अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें केंद्र से अनुरोध किया गया है कि वह राज्य के मछुआरों के पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की रक्षा के लिए स्थायी समाधान के रूप में श्रीलंका को सौंपे गए कच्चातीवु द्वीप को वापस ले।
मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को इस मुद्दे पर गहन चर्चा के बाद मुख्य विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्नाद्रमुक मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने समर्थन दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया।
मुख्यमंत्री ने सभी से पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की, क्योंकि यह मछुआरों के कल्याण से जुड़ा है।
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘कच्चातीवु द्वीप को वापस लेना तमिलनाडु के मछुआरों के पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की रक्षा करने और श्रीलंकाई नौसेना के कारण उन्हें होने वाली परेशानियों को कम करने का एकमात्र स्थायी समाधान है।’’
प्रस्ताव के अनुसार, ‘‘उपर्युक्त बातों पर विचार करते हुए यह सम्मानित सदन सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि वह भारत-श्रीलंका समझौते की तत्काल समीक्षा करे और कच्चातीवु द्वीप को वापस पाने के लिए सभी कदम उठाए। सदन भारत के माननीय प्रधानमंत्री से आग्रह करता है कि वह श्रीलंका की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान सद्भावना के आधार पर हमारे सभी बंदी मछुआरों को रिहा कराने तथा उनकी जब्त नौकाओं को वापस कराने के लिए श्रीलंका सरकार से बातचीत करें।’’
भारत ने 1974 और 1976 में समझौतों के माध्यम से कच्चातीवु द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया था।
भाषा सुरभि नरेश
नरेश