बरेली (उप्र), 26 फरवरी (भाषा) बरेली जिले की एक अदालत ने, वर्ष 2010 में एक महिला आईपीएस अधिकारी को कार से कुचलकर मार डालने की कोशिश के मामले में आरोपी यातायात पुलिस के तीन सिपाहियों और एक ऑटो रिक्शा चालक को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
सहायक अभियोजन अधिकारी विप्रणा गौड़ ने बताया कि दो सितंबर 2010 की रात बरेली की सड़कों पर यातायात पुलिसकर्मियों की एक टोली ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर रही थी। कुछ समय बाद बरेली में पुलिस अधीक्षक (यातायात) के पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी कल्पना सक्सेना मौके पर पहुंचीं।
उन्होंने बताया कि सक्सेना ने अवैध वसूली कर रहे सिपाही मनोज को पकड़ लिया। उसे बचाने की कोशिश में आरोपियों ने सक्सेना को कार से कुचलने की कोशिश की।
गौड़ ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें धक्का देकर सड़क पर गिराया और उन्हें 200 मीटर तक घसीटते हुए ले गये जिससे उन्हें काफी चोट लगी। घायल अवस्था में उन्हें आनन फानन में गंगाचरण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना में एक ऑटो रिक्शा चालक भी शामिल था।
गौड़ ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ कैंट थाने में प्राथमिकी पंजीकृत हुई थी। मामले में विशेष लोक अभियोजक मनोज बाजपेई ने अदालत में 14 गवाह और 22 ठोस सुबूत पेश किये थे।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) सुरेश कुमार गुप्ता ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यातायात पुलिस के सिपाही मनोज कुमार, रावेन्द्र सिंह और रविन्द्र सिंह तथा ऑटो रिक्शा चालक धर्मेन्द्र को दोषी करार देते हुए सोमवार को 10-10 साल के सश्रम कारावास एवं 50-50 हजार रूपये जुर्माने की सजा सुनाई।
कल्पना सक्सेना इस वक्त गाजियाबाद में अपर पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात हैं।
भाषा सं सलीम मनीषा
मनीषा