कड़ी सुरक्षा के बीच पेत्रपोल भूमि बंदरगाह से भारत-बांग्लादेश व्यापार फिर से शुरू

Ankit
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कोलकाता, आठ अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल में पेत्रपोल भूमि बंदरगाह के जरिये भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार बृहस्पतिवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच फिर से शुरू हो गया।


बांग्लादेश में शेख हसीना के इस्तीफा देने के बाद पांच अगस्त को दोनों दक्षिण एशियाई देशों के बीच व्यापार रुक गया था। पेत्रपोल को छोड़कर पश्चिम बंगाल के कई स्थल बंदरगाहों के जरिये बुधवार को आंशिक रूप से इसे फिर शुरू किया गया।

पेत्रपोल के जरिये द्विपक्षीय व्यापार बांग्लादेश के साथ साझा सभी स्थलीय बंदरगाहों में सबसे अधिक है।

एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया, ‘‘ पेत्रपोल से सुबह से व्यापार शुरू हो गया है। गतिरोध दूर करने के लिए कल दोनों देशों के हितधारकों ने बैठक की थी।’’

बेनापोल सीएंडएफ स्टाफ एसोसिएशन के महासचिव साजिदुर रहमान ने बुधवार शाम की बैठक के बाद कहा था कि बृहस्पतिवार सुबह व्यापार फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

बेनापोल पश्चिम बंगाल में पेत्रपोल सीमा के बांग्लादेश की ओर स्थित है।

हिली, चंगराबांधा, महादीपुर, फुलबारी और घोजादंगा जैसे स्थल बंदरगाहों पर व्यापार बुधवार को मुख्यतः शीघ्र खराब होने वाले सामानों का आंशिक रूप से पुनः शुरू हो गया।

बांग्लादेश को भारत का निर्यात 2022-23 में 12.21 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर 2023-24 में 11 अरब डॉलर रह गया। आयात भी पिछले वित्त वर्ष में घटकर 1.84 अरब डॉलर रह गया, जो 2022-23 में दो अरब डॉलर था। बांग्लादेश को भारत के मुख्य निर्यात में सब्जियां, कॉफी, चाय, मसाले, चीनी, रिफाइंड पेट्रोलियम तेल, रसायन, कपास, लोहा और इस्पात तथा वाहन आदि शामिल हैं।

वहीं भारत को बांग्लादेश का निर्यात कुछ श्रेणियों जैसे वस्त्र तथा परिधानों तक ही सीमित है, जो उनके निर्यात का 56 प्रतिशत है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में जान गंवाने वालों की संख्या मंगलवार को 440 हो गई है। हालांकि, हिंसा प्रभावित देश में स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सेना द्वारा प्रयास जारी हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को मंगलवार को बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने देश की अंतरिम सरकार का प्रमुख नियुक्त किया। इससे एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नौकरियों में विवादास्पद आरक्षण प्रणाली को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया था और वह देश छोड़कर चली गईं थी।

भाषा निहारिका

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