कोलकाता, तीन अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा 25,000 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य घोषित करने से हाईस्कूल परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में बहुत अधिक व्यवधान नहीं आएगा और 12वीं कक्षा के स्तर पर परीक्षा परिणामों के प्रकाशन में देरी नहीं होगी।
परिषद के अध्यक्ष चिरंजीव भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि अदालत के फैसले के बाद जिन लोगों की नौकरी चली गई, उनमें से लगभग 10-15 प्रतिशत ही उच्चतर माध्यमिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में शामिल थे।
सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को बृहस्पतिवार को अवैध करार दिया और पूरी चयन प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताया।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने नियुक्तियों को रद्द करने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के 22 अप्रैल, 2024 के फैसले को बरकरार रखा।
भट्टाचार्य ने कहा कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों में से परिषद द्वारा नियुक्त 40-50 हजार परीक्षकों में अमान्य परीक्षकों की संख्या 10-15 प्रतिशत से अधिक नहीं है और परिषद को मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी या व्यवधान की आशंका नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘हम जमीनी स्तर पर प्रभाव के आकलन के बाद दो-तीन दिन में स्थिति पर निर्णय लेंगे। हालांकि, चूंकि अभ्यर्थियों की संख्या लगभग 5.9 लाख है, जो पिछले वर्षों की तुलना में कम है, इसलिए परीक्षकों की संख्या में 10-15 प्रतिशत की गिरावट से कोई समस्या नहीं आएगी।’
उच्चतर माध्यमिक परीक्षा का परिणाम दो मई को प्रकाशित होगा। 2024 में, पश्चिम बंगाल उच्चतर माध्यमिक (कक्षा 12) परीक्षा में 7,55,324, जबकि 2023 में 8,24,891 छात्र शामिल हुए थे।
इस साल पश्चिम बंगाल उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद (डब्ल्यूबीसीएचएसई) की कक्षा 12 की परीक्षाएं तीन से 18 मार्च के बीच आयोजित की गई थीं।
भाषा जोहेब पारुल
पारुल