मुंबई, पांच अप्रैल (भाषा) भारत के पूर्व मुख्य कोच और राजस्थान रॉयल्स के मेंटर (मार्गदर्शक) राहुल द्रविड़ की देखरेख में खेलने वाले युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने कहा कि इस युग में उनके जैसा सहानुभूति के साथ देखभाल करने वाला इंसान का साथ मिलना सौभाग्य की बात है।
भारतीय टेस्ट टीम के मुख्य सलामी बल्लेबाज जायसवाल राजस्थान रॉयल्स के अहम खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने अपने करियर पर द्रविड़ के प्रभाव के बारे में बात करते हुए पूर्व भारतीय दिग्गज को बेहतरीन इंसान करार दिया।
जायसवाल ने ‘जियोहॉटस्टार’ से कहा, ‘‘वह एक बेहतरीन इंसान हैं। इस युग में राहुल द्रविड़ सर जैसे खिलाड़ी का होना सौभाग्य की बात है।’’
इस खब्बू बल्लेबाज ने विस्तार से बताया कि द्रविड़ एक इंसान के तौर पर किस तरह अलग हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह एक बेहतरीन ‘लीडर’ है। वह एक शानदार सहायक और देखभाल करने के साथ हमेशा सभी का ख्याल रखने वाले इंसान है। वह खिलाड़ियों में आत्मविश्वास भरते हैं, उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि वे सही जगह पर हैं। वह सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, जो व्यक्तिगत करियर और पूरी टीम दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।’’
द्रविड़ के साथ कोई भी बातचीत सीखने का अवसर है।
जायसवाल ने कहा, ‘‘उनके करीब रहना सीखने का अवसर है। यह सीख न केवल क्रिकेट के बारे में, बल्कि मैदान के बाहर उनके व्यवहार के बारे में भी है। उन्होंने वर्षों से इतनी शालीनता और संयम दिखाया है। उनसे सीखने के लिए बहुत कुछ है।’’
करियर के मोर्चे पर जायसवाल ने पेशेवर खिलाड़ी के तौर पर मुंबई से गोवा जाने का फैसला किया है और अगले सत्र में रणजी ट्रॉफी में उनकी कप्तानी करने के लिए तैयार हैं (जब भी उन्हें खेलने का समय मिलेगा)।
जायसवाल के इस फैसले का कारण हालांकि पता नहीं चल पाया है, लेकिन ऐसी अफवाहें हैं कि मुंबई की टीम के सीनियर सदस्यों के साथ उनके कुछ मतभेद हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुद पर बहुत भरोसा है। अपने खेल, अपने विचारों और अपनी क्षमताओं पर यकीन है। अपने करियर को आगे ले जाना आखिरकार मेरी ही जिम्मेदारी है और मुझे पता है कि मुझे कितनी मेहनत करनी है। क्रिकेट में बहुत त्याग की जरूरत होती है, लेकिन लोग तभी इस पर ध्यान देते हैं जब आप कुछ हासिल करते हैं या अच्छा प्रदर्शन करते हैं। मुझे लगता है कि सफल होने के लिए मुझे हर पहलू पर कड़ी मेहनत करने की जरूरत है अब वह चाहे अभ्यास हो, प्रशिक्षण हो, आहार हो या मानसिकता हो।’’
भाषा आनन्द पंत
पंत